Thursday, April 22, 2021

सब जाग रहे तू सोता रह………….

                                            सब जाग रहे तू सोता रह………….                                                                                       

 

सब जाग रहे तू सोता रह……….

किस्‍मत को थामे रोता रह ।1

जो दूर है माना मिला नहीं

जो पास भी है वो भी खोता रह ।2

लहरों पर मोती चमक रहे

झोंके भी तुझ तक सिमट रह ।3

न तूफान कोई आने वाला

सब तह तक गोते लगा रह ।4

लहरें तेरी कदमों में है

तू नाव पकड़ बस रोता रह ।5

सब जाग रहे तू सोता रह

किस्‍मत को थामे रोता रह ।6

धूप अभी सिरहाने है

मौसम जाने पहचाने है ।7

रात अभी तो घंटो है

बस कुछ पल दूर ठिकाने है ।8
इतनी दूरी तय कर आया

दो पग चलने में रोता रह ।9

सब जाग रहे तू सोता रह

किस्‍मत को थामे रोता रह ।10

माना कि मुश्किल भारी है

पर तुझमें क्‍या लाचारी है ।11

ये हार नहीं बाहर की है

भीतर से हिम्‍मत हारी है ।12

उठ रहे यहां, सब गिर-गिर कर

न उठ तू यूँ ही लेटा रह ।13

सब जाग रहे तू सोता रह

किस्‍मत को थामे रोता रह ।14

जो दूर है माना मिला नहीं

जो पास भी है वो भी खोता रह ।15।

कवि

संदीप द्वेदी

 

 

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